अप्रैल 28, 2017

टाटा सन्स की ओर से जारी बयान

मुंबई: टाटा सन्स ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदे श का स्वागत किया जिसमें कंपनी व एनटीटी को 22 जून 2016 को लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन (एलसीआईए) आदेश कार्यान्वित करने की अनुमति दी हैं।

इस अदालत ने आदेशको लागू करने और दोनो पक्षों के बीच सहमति के कार्यान्वयन, दोनो की ही अनुमति दी। टाटा संस तथा एनटीटी डोकोमो इस आदेश के संबंध में आगे के कदम उठा रहे हैं।

इस अदालत ने कहा कि शेयरधारखों के अनुबंध तथा पंचाट आदेश ने भारतीय कानून या सार्वजनिक नीति के किसी प्रावधान का विरोध नहीं किया था। सहमति शर्तें भी किसी भी भारतीय कानून के विपरीत नहीं है, जैसा कि आदेश कहता है।

अदालत ने स्थापित किया कि टाटा संस द्वारा अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करते हुए “अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में इसकी साख व प्रतिष्ठा को प्रभावित करेगी।”

अदालत ने आगे कहा, “यह निश्चित ही विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाहों तता किसी अनुबंध में शामिल स्थित कंपनियों के देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को प्रभावित करेगा।”

टाटा संस ने इस वर्ष फरवरी में घोषणा की थी कि एनटीटी डोकोमो व इसके बीच एक अनुबंध हो गया है। आज का आदेश इस बात पर जोर देता है कि टाटा संस तथा इसके नामिती पहले से दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के पास जमा $1.18 बिलियन को डोकोमो को मुक्त करेंगे तथा डोकोमों अपने टाटा टेलीसर्विसेस लिमिटेड के अपने सभी शेयरों को स्थानांतरित करेंगे।