जनवरी 2018

दुनिया से मुकाबला

टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स, 2025 तक दुनिया के टॉप 50 ग्लोबल ऑटो कम्पोनेंट खिलाड़ियों में शामिल होने के लिए एक रणनीति पर काम कर रहे हैं

कोई सपना इतना बड़ा नहीं होता अगर उसके प्रति सही एकाग्रता हो। बहुत दिन नहीं बीते हैं जब, टाटा समूह का ऑटो अधीनस्थ स्कंध, टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स, मुख्यधारा में टिके रहने के लिए हाथ-पैर मार रहा था। इसने एक बड़ा पुनर्गठन करते हुए कई संयुक्त उपक्रम शुरू किए और लागत में कटौती पर जोर दिया जिससे संगठन अपने पैरों पर खड़ा हो सके। आज, टाटा ऑटोकॉम्प एक लाभप्रद डिविडेंट भुगतानकर्ता कंपनी है। इसके अलावा, इसने अपनी एक वैश्विक मौजूदगी भी दर्ज कराई है और इसकी नजर अगली मंजिल की ओर है- 2025 तक विश्व के टॉप 50 में शामिल होना।

इसकी संवृद्धि यात्रा में एक बड़ा कदम घरेलू बाजार की सीमाओं से बाहर निकलना और अधिग्रहण के माध्यम से वैश्विक अस्तित्व कायम करना था। यह एक गहन अभ्यास था जो 3,500 कंपनियों की पहचान के साथ शुरू हुआ। लक्ष्य सूची को तीन आयामों से विश्लेषित किया गया- आकार, व्यवहार्यता तथा रणनैतिक उपयुक्तता- जिसके माध्यम से 116 को सूचीबद्ध किया गया, तथा इसके बाद इसे और संक्षिप्त करते हुए 32 ‘ड्रीम लक्ष्यों’ को चुना गया।

कंपनी को अंतिम रूप से टाइटनएक्स में अपना ठिकाना मिला, जो स्वीडन स्थित वाणिज्यिक वाहन निर्माताओं के लिए पावरट्रेन कूलिंग समाधानों के एक वैश्विक आपूर्तिकर्ता हैं। “टाइटनएक्स एक बेहतर उपयुक्त रहा और हमें एक वैश्विक खिलाड़ी बना दिया। हमने दिसंबर 2016 में कंपनी का अधिग्रहण किया, टाटा ऑटोकॉम्प के एमडी तथा सीईओ, ” अजय टंडन याद करते हुए कहते हैं।

कंपनी’के लक्ष्यों तथा व्यवसाय के बदलते मानदंडों को देखते हुए, यह कई मायनों में एक बड़ा सौदा था। एकबार में, टाइटनएक्स ने पुणे स्थित ऑटो कम्पोनेंट को यूएस तथा यूरोप के दो बड़े बाजारों में ग्राहकों तक पहुंचने का मार्ग बना दिया। टाइटनएक्स’के स्वीडन, यूएसए, ब्राजील, चीन तथा मैक्सिको स्थित उत्पाद विकास तथा विनिर्माण केंद्रों ने टाटा ऑटोकॉम्प के लिए विभिन्न प्रकार की प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराई, खासतौर पर रेडियेटर के विनिर्माण के लिए, जो यूरो VI मानकों के लिए उपयुक्त हो।

टाइटनएक्स’ जिस एक और क्षेत्र में उपयुक्त सहयोगी बना, वह उसकी आधुनिक टेस्टिंग सुविधाएं हैं। “अगले कुछ वर्षों में वाहन क्षेत्र में टेस्टिंग की जरूरत बढ़ती हुई प्रतीत होती है, ” श्री टंडन स्पष्ट करते हुए कहते हैं। “टाइटनएक्स के पास इसके स्वीडन तथा यूएस स्थित दो बड़े कारखानों में पावर ट्रेन कूलिंग समाधानों के लिए पूर्ण ट्रक-टेस्टिंग क्षमताएं मौजूद हैं।” टाइटनएक्स के अधिग्रहण से टाटा ऑटोकॉम्प को इसके व्यवसाय को जोखिमरहित करने के द्वारा रणनीतिक बढ़त मिली है। “इस वर्ष हमारा 35% राजस्व भारत के बाहर से आएगा, ” श्री टंडन कहते हैं।

सही कदम

इसके संचालनों को जोखिमरहित करने का एक अन्य पहलू इसके घरेलू ग्राहक पोर्टफोलियो में प्रसार रहा। टाटा ऑटोकॉम्प अपने ग्राहकों के साथ ‘निकट’ होते हुए धीरे-धीरे विकसित हुआ है। काम्पोनेंट आपूर्तिकर्ताओं को खासतौर पर अपने बड़े ग्राहकों के संयंत्रों के पास कारखाने स्थापित करने की जरूरत पड़ती है। कंपनी के 41 संयंत्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें आठ भारत से बाहर हैं। इसके सात जेवी फिलहाल संचालित हैं, जिनमें से तीन को गत चार वर्षों में हस्ताक्षरित किया गया था। इसके नए कारखानों में शामिल हैं, चांगशु, चीन में जैगुआर लैंड रोवर के लिए एक संयंत्र; रेनाल्ट के लिए चेन्नई में एक संयंत्र; फोर्ड के लिए साणंद, गुजरात में एक संयंत्र; तथा श्री सिटी, आंध्रप्रदेश में इसुजू के लिए एक संयंत्र।

ग्राहक भूमिका की मांग

यात्री वाहन: फियेट, फोर्ड, जीएम, होंडा, इसुजू, जेएलआर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, निसान, रेनाल्ट, स्कोडा, टाटा मोटर्स, टोयोटा, फॉक्सवैगन

वाणिज्यिक वाहन: अशोक लीलैंड, भारत बेंज, डेमलर-मर्सीडीज, फोर्स मोटर्स, आईवीईसीओ, महिंद्रा एंड महिंद्रा, नेवीस्टार, पियाजियो, रेनाल्ट, स्कानिया, एसएमएल इसुजु, टाटा मोटर्स, वोल्वो आयशर, वोल्वो

ट्रैक्टर्स: जॉन डीयर, महिंद्रा, न्यू हॉलैंड, स्वराज, ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट

व्यवसाय के लिए ग्राहकों का इतना व्यापक प्रसार आवश्यक है। “कोई ग्राहक का हमारे व्यवसाय में 35% से अधिक का हिस्सेदार नहीं होगा, ” श्री टंडन कहते हैं। टाटा मोटर्स ‘एंकर ग्राहक’ बने हुए हैं, लेकिन टाटा ऑटोकॉम्प’के ग्राहकों की सूची में देश के लगभग सभी भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बड़े संचालन शामिल हैं (बॉक्स देखें)।

इस रणनीति से कंपनी को कठिन बाजार स्थितियों में भी टिके रहने में सहायता दी। “पिछले तीन-चार साल ऑटो कंपोनेंट बाजार के लिए बहुत कठिन रहे; भारत में ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर इकाइयों (OEM) के व्यवसाय में बहुत धीमी वृद्धि हुई, और साथ ही, कच्चे माल, भाड़ा, बिजली आदि की लागत में वृद्धि के साथ लागत बढ़ाने का भी दबाव रहा, ” श्री टंडन बताते हैं।

इससे भी ज्यादा, ऑटो सहायक उद्योग की प्रवृत्ति ऐसी है कि जब ओईएम ने नए उत्पाद खरीदने का निर्णय कर भी लिया, उसके बाद कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं को आर्डर और राजस्व प्राप्ति के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है। श्री टंडन स्पष्ट करते हैं कि“ एक ऑटो ओईएम से आरएफक्यू (कोटेशन के लिए अनुरोध) प्राप्त करने में छः महीने लग सकते हैं, और आगे छः महीने एक आर्डर को अंतिम रूप से देने में लगते हैं, और उसके लिए उत्पादन को शुरू करने में उसके बाद दो से तीन साल का समय लगता है। हमें संयंत्र और उपकरणों में तुरंत निवेश करना पड़ता है, और कल-पुर्जे को डिजाइन करने और बनाने में समय लगता है। तीसरे या चौथे साल से ही नकद की घंटी बजनी शुरू होती है।”

आगे का रास्ता

सौभाग्यवश टाटा ऑटोकॉम्प के लिए, पिछले तीन वर्षों तक बैलेंस शीट और ऑर्डर बुक का रिकार्ड अच्छा बना रहा। “उद्योग में एक अंक की वृद्धि रही है, लेकिन हमने अपनी लाभदायकता के लिए कठोर प्रयत्न किए हैं। हमने आर्डर बुकिंग, तथा लागत कटौती पर अच्छा काम किया है, ” श्री टंडन कहते हैं।

गत वर्ष, टाटा ऑटोकॉम्प’की राजस्व वृद्धि 20% के आसपास रही। “हम इस वर्ष राजस्व तथा लाभ दोनों में वृद्धि की उम्मीद करते हैं, ” श्री टंडन कहते हैं। टाइटनएक्स के अधिग्रहण के साथ, टाटा ऑटोकॉम्प’का टॉपलाइन 50% के लगभग बढ़ेगा।

इस वृद्धि योजना के लिए इसके पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता हो, यह सुनिश्चित करने के लिए, कंपनी पुणे के चाकन में एक 80-एकड़ के औद्योगिक स्थल पर नया संयंत्र स्थापित कर रही है। कंपनी अपने भविष्य के पुनर्निधारण के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा संयंत्र स्वचालन प्रक्रियाओं की खोज कर रही है।

कंपनी’ की उत्पाद श्रेणी भी बदल रही है। वर्षों तक, टाटा ऑटोकॉम्प’की उत्पाद श्रेणियां ऑटोमोबाइल के तीन पहलुओं पर केंद्रित रहीं- कंफर्ट, एमीशन और सेफ्टी। चूंकि ऑटो कंपोनेंट बाजार भारत में लगभग 39 बिलियन डॉलर अनुमानित है, और विश्व में 1.75 ट्रिलयन डॉलर, अतः श्री टंडन आने वाले वर्षों में कंपनी के विकास की काफी संभावनाएं देखते हैं।

यह नए उत्पादों के माध्यम से हो सकता है, व्यवसाय के मौजूदा प्रकारों तथा नए तरीकों दोनों के माध्यम से। अभी टाटा ऑटोकॉम्प द्वारा उत्पादित लगभग 40% कंपोनेंट हैं जिनका उपयोग कारों में होता है, जबकि अन्य 40% का उपयोग वाणिज्यिक वाहनों में किया जाता है। बाकी का उपयोग नए व्यवसाय क्षेत्रों जैसे कि दोपहिया, ट्रैक्टर तथा निर्माण उपकरणों में किया जाता है।

टाटा ऑटोकॉम्प परंपरागत वाहन क्षेत्रों पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए भी काम कर रहे हैं। इसकी योजना अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय रेल को आपूर्ति करने की है, और इसने देशभर में आनेवाले नए मेट्रो प्रॉजेक्ट में प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं जैसे क्यूमिंस तथा बॉम्बार्डियर के साथ मिलकर काम किया है।

एक नयी कार्ययोजना

लेकिन वास्तविक काम तो आनेवाले प्रौद्योगिकी-चालित वाहनों में ही दिखेगा। “नए व्यवसाय शुरू करने तथा बढ़ाने की रणनीति के एक भाग के रूप में, हम आज वाहन क्षेत्र में उभरते हुए नए टॉप रुझानों का भी समर्थन कर रहे हैं, जैसे कि बिजली की कारें तथा संपर्कित वाहन, ” श्री टंडन कहते हैं। “हमने नई लहर के लिए तैयार होना शुरू कर दिया है। ऑटो कंपोनेंट उद्योग में अभी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि हो रही है।” यह इस सेक्टर के लिए भारत में अच्छा समय है। सरकार द्वारा ऑटोमोबाइल तथा ऑटो कंपोनेंट उद्योग को ग्रोथ सेक्टर घोषित किया गया है, और ये प्रमुख मेक इन इंडिया कार्यक्रम के भी अंग हैं।

टाटा ऑटोकॉम्प’के आगामी रूपांतरण चरण में सबसे ज्यादा बढोत्तरी हुई है; इसके तहत लोग तथा उत्पादकता प्रयासों को भी शामिल किया गया है। इस रूपांतरण चरण में कर्मचारी संलग्नता एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है। कुछ वर्ष पहले, जब ऑटो सहायक उद्योग मंदी से गुजर रहा था, टाटा ऑटोकॉम्प’की कर्मचारी संलग्नता (2013 में) 38% तक कम हो गई थी। इस स्थिति में कुछ गहन उपायों की जरूरत थी।

“हमने कर्मचारी संलग्नता और क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया, ” श्री टंडन कहते हैं। कंपनी ने एक भावी प्रतिभा तथा नेतृत्व श्रेणी तैयार करना शुरू किया। अब तक, लगभग 300 टाटा ऑटोकॉम्प’के मैनेजरों का वैश्विक एसएचएल मूल्यांकन किया जा चुका है जो अक्सर किसी संगठन में संभावित नेतृत्वकर्ताओं की पहचान के लिए आयोजित किया जाता है। एक प्रमुख प्रौद्योगिकी अधिकारी तथा एक प्रमुख रूपांतरण अधिकारी को नियुक्त किया गया है। अपने सफल लोक रूपांतरण प्रयासों के लिए, टाटा ऑटोकॉम्प को 2016 तथा 2017 में आओन हैविट बेस्ट एम्प्लॉयर अवार्ड मिला है।

कंपनी गुणवत्ता तथा सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में कुछ बड़े लक्ष्य तय करने जा रही है। “सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है, कर्मचारी तथा ग्राहक दोनों दृष्टिकोण से, और हमने इस मुद्दे पर काफी काम किया है। कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं में कमी आई है। पिछले चार वर्षों में, कोई मृत्यु नहीं हुई है। हमारे कर्मचारी अधिक संलग्न तथा सुरक्षित महसूस करते हैं, और हमारे ग्राहकों को अनवरत आपूर्ति का भरोसा रहता है। हम 2022 तक एक डेमिंग अवार्ड कंपनी बनना चाहते हैं और इससे पहले सुरक्षा के लिए सॉर्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करना चाहते हैं, ” एमडी कहते हैं।

टाटा ऑटोकॉम्प ने अपनी सभी योजनाओं का निर्धारण दीर्घावधि संवृद्धि को ध्यान में रखकर किया है। सपने सच हो रहे हैं, और इसका समय सही लग रहा है।

"हम प्रौद्योगिकी पर बहुत जोर देते हैं।"

आईआईटी मद्रास के एक अभियंता, तथा आईआईटी अहमदाबाद के एक स्नातक, अजय टंडन भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता की भूमिका में 17 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने सितंबर 2013 में टाटा ऑटोकॉम्प के प्रबंध निदेशक तथा सीईओ का कार्यभार संभाला। संपादित अंश:

टाटा ऑटोकॉम्प का विकास
2008 से 2013 तक की अवधि में कंपनी को एक बड़े पुनर्गठन अभ्यास से गुजरना पड़ा। हमने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विकास किया है और आज, टाटा ऑटोकॉम्प एक वैश्विक कंपनी है। हम तीन औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद हैं- इंटीरियर तथा एक्सटीरियर; कूलिंग, एमीशन तथा सस्पेंशन; तथा आफ्टरमार्केट और सर्विसेज।

गत वर्ष, हमने लगभग 20% विकास किया; इस वर्ष हम लगभग 50% वृद्धि की उम्मीद करते हैं। हमारा लक्ष्य 2021 तक भारत के 10 टॉप ऑटो कंपोनेंट विनिर्माताओं में तथा विश्व के टॉप 100 विनिर्माताओं में, तथा 2025 तक भारत के टॉप पांच और विश्व के टॉप 50 विनिर्माताओं में शामिल होना है। हमारा वर्तमान सकल टर्नओवर 47 बिलियन तक पहुंच गया है; 2025 तक, हमें उम्मीद है कि हमारा टर्नओवर 300 बिलियन को पार कर जाएगा।

प्रौद्योगिकी और नवाचार
हम प्रौद्योगिकी पर काफी जोर देते हैं। पहले, हम टाटा इन्नो विस्टा (वार्षिक टाटा समूह नवाचार प्लेटफॉर्म) के लिए अमूमन 35 से 40 प्रविष्टियां लाते थे। पिछले वर्ष, हमने लगभग 280 प्रविष्टियां कीं। हम अपने अभियंताओं को नए उत्पाद लाते हुए अलग तरह से सोचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

हमने अपने बजट में टर्नओवर का 1% नई प्रौद्योगिकी के लिए तय किया है- प्रयोगशालाओं का उन्नयन, नए आर&डी केंद्र स्थापित करने तथा नए उपकरण बनाने के लिए। हमारे कई अभियंत्रण केंद्रों को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग से मान्यता प्राप्त है।

ग्राहक मांग
हम भारत के लगभग सभी ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं को आपूर्ति करते हैं। हमने यह सुनिश्चित करते हुए अपने व्यवसाय को जोखिम रहित किया है कि हमारे राजस्व का 35% भारत के बाहर से आए और किसी एक ग्राहक पर हमारे व्यवसाय का 35% से अधिक निर्भर न हो। इसके साथ ही, हमने अपने ‘एंकर ग्राहक’, टाटा मोटर्स पर केंद्रित होने के सिद्धांत पर भी बल दिया है। बाजार वातावरण के बावजूद, हमने उनके किसी भी आदेश को हाथ से जाने नहीं दिया है, और आगे भी, हम उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहेंगे।