जनवरी 2017

क्योंकि हमें परवाह है

वन्यजीवन, पर्यावरण एवं पारिस्थिति विज्ञान (ईकोलॉजी), और कला एवं संस्कृति के संरक्षण के प्रति टाटा कंपनियों तथा टाटा ट्रस्ट का गहरा लगाव रहा है।  एक फोटो फीचर जो विविध प्रयासों को दर्शाता है

हरियाली की बगिया

पेड़ एवं वनस्पति तथा उन्हें संपोषित करने वाला ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी) वे आधार हैं जिसपर दुनिया की खाद्य श्रृंखला टिकी हुई है, ये ऊर्जा देने वाले वे अंतर्भूत कारक हैं जो पृथ्वी पर जीवन के संवर्धन को संभव बनाते हैं। वे कुदरती रूप से कार्बन का अवशोषण करते हैं, वे ऑक्सीजन का निर्माता होते हैं, लाखों किस्म के प्राकृतिक संसाधनों का सृजन करते हैं और मानव तथा अन्य प्राणियों के जीवन का मूलाधार होते हैं। दुर्भाग्य से, जो प्रकृति वनस्पति और प्राणि दोनों को इस पृथ्वी पर फलने-फूलने की सुविधा देती है वही आज जलवायु परिवर्तन तथा मनुष्य की अथाह उपभोग आकांक्षा के कारण संकटग्रस्त हो रही है।

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प्राणियों को राहत

वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड का अनुमान है कि कम से कम 10,000 प्रजातियां हर साल लुप्त हो रही हैं। इसका अर्थ हुआ कि आज सहित प्रतिदिन धरती पर से 27 प्रजाति लुप्त हो जाएंगे। होमो सैपिएंस द्वारा दूसरे प्राणियों के पर्यावास का अतिक्रमण करने से प्राणी जगत एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है। धरती के वन्यजीवन सिकुड़ते पर्यावास, लुप्त होते खाद्य स्रोत, लगातार दुर्बल होता ईकोसिस्टम और सबसे गंभीर बात कि दोपाए शिकारियों के खतरे से संकट में पड़ गए हैं। जीवमंडल के नाजुक संतुलन के अपूरणीय रूप से बिगड़ते जाने के कारण अब यह मनुष्य की जिम्मेदारी है कि प्राणि जगत में अब जो कुछ भी बच गया है उसकी रक्षा कर वह अपने किए की क्षतिपूर्ति करे।

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अधिक जानकारी के लिए टाटा रिव्यू का 2017 संस्करण देखें