नवम्बर 2017

'आइये सहयोग करें और आकांक्षाएं रखें'

नटराजन चंद्रशेखरन, या चंद्रा, (जैसा कि उनको अक्सर कहा जाता है), इस साल की शुरुआत से टाटा समूह के मुखिया के रूप में काम शुरु करने के समय से काफी व्यस्त रहे हैं। 53 साल के टाटा सन्स के चेयरमैन ने एक ऐसे एजेंडे को तय करने के लिए जबरदस्त गति का निर्धारण किया है जो समूह की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगा और साथ ही एक संयुक्त रणनीति की दिशा में कंपनियों के विविध सेट को गाइड भी करेगा।

एम चंद्रशेखरन, एक अनुभवी मैराथन धावक ने क्रिस्टाबेल नोरोन्हा के साथ अपने समूह के विजन को पेश करते हुए और इसके प्रांसगिक बने रहने के लिए विकास की योजना को लेकर अपनी बातचीत में काफी सारे क्षेत्रों को शामिल किया। आकांक्षाएं और सहयोग, सन्स्कृति और चुनौतियां, कर्मचारियों द्वारा लगातार उच्च प्रदर्शन की जरूरत, समुदाय और देश की सेवा — श्री चंद्रशेखरन, इन सब पर तथा अन्य पर अपनी स्थिति और प्राथमिकताओं को समझाने में कापी स्पष्ट रहे हैं।

उनके साक्षात्कार के संपादित अंश:

बाहर से देखने से ऐसा लगता है कि टाटा सन्स के चेयरमैन के रूप में नियुक्त होने के बाद से आप लगातार दौड़भाग में लगे रहे हैं। आपके भीतर का मैराथन धावक किस तरह से इस आपाधापी का सामना कर रहा है?

एक लंबी दूरी के धावक के रूप में अपनी ताकतों और कमजोरियों को समझना बहुत जरूरी है। पहले आपको कमजोरियों को संबोधित करना होता है। इसके समांतर आपको अपनी शक्ति का निर्माण करना होता है और फिर उसे संरक्षित करना होता है। मैने यही करने का निर्णय लिया है। काम संभालने के समय से, हमने काफी सारा समय अपनी शक्तियों तथा अधिक मजबूत होने के लिए जरूरी कामों को समझने में लगाया है।

ना केवल वित्तीय विश्लेषण के मामले में बल्कि हमारी रणनीति की समीक्षा, प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन और प्रतिभा के मामले में इस यात्रा के कई पहलू हैं। फोकस के आरंभिक क्षेत्रों में से एक, तत्काल काम करने के लिए जरूरी कौशल वाली एक टीम का निर्माण रहा है।

व्यावसायिक दृष्टिकोण से हमने उन परिस्थितियों पर फोकस किया है जहां प्राथमिक हस्तक्षेप की जरूरत है, जैसे टाटा स्टील- थाएसेनक्रुप मर्जर और टाटा टेलेसर्विसेज़-भारती डील। यह कहना सही होगा कि हमने उन मामलों पर फोकस किया जिनको हमारे ध्यान की जरूरत थी। कुल मिलाकर, अभी तक यह हमारे लिए एक अच्छा अनुभव रहा है।

आप, चार्ज संभालने के समय से ‘वन टाटा’ के बारे में बोलते रहे हैं। इस सिद्धांत का क्या सार है?

यदि आप हमारी विरासत, हमारे मूल्य सिस्टम, हमारी सन्स्कृति औऱ हमारी क्षमताओं को देखें तो हमारे जैसा कोई दूसरा समूह नहीं है। हमारी गुणवत्ता और विशेषताएं हमें दूसरे समूहों से काफी अलग खड़ा करते हैं।

‘वन टाटा’ एक ऐसा सिद्धांत है जिसे टाटा समूह में अपनी लंबी यात्रा के दौरान मैने पेश किया है, और जब मैने इस भूमिका को अपनाया तो यह मेरे मन में स्पष्ट रूप से उपस्थित था।

‘वन टाटा’ एक मनःस्थिति है। टाटा समूह का हिस्सा होने का क्या मतलब है - किसी कंपनी, किसी कर्मचारी, किसी लीडर के लिए? अपनी सामूहिक ताकत का लाभ लेने, संबंधों और साझेदारियों का लाभ लेने, ज्ञान और विशेषज्ञता का लाभ लेने और एक समूह के रूप में हमारी साख और दृढ़ता का लाभ लेने के लिए हम क्या बेहतर कर सकते हैं? टाटा कंपनियों का सहयोगी एकीकरण, टाटा इकोसिस्टम के भीतर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर एक महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकता है। जिसके परिणामस्वरूप टाटा सन्स और समाज में अंतर पैदा हो सकता है।

‘वन टाटा’ निश्चय ही एक वित्तीय प्रभाव डालेगा। इसके अलावा, यह हमारे कर्मचारियों, उनके कैरियर मार्ग के साथ-साथ व्यापक समुदाय के लिए भी लाभदायक होगा। ‘वन टाटा’ का एक बुनियादी तत्व हमारे सीनियर लीडरों के विचारों को प्रभावित करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे अपनी टीमों में इस नीचे की ओर प्रवाहित करें। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है; यह सोचने और मनःस्थिति में बदलाव की बात है।

आपने ‘वन टाटा’ और इससे टाटा सन्स को होने वाले लाभ के बारे में बात की। टाटा ट्रस्ट्स के बारे में क्या, जो कि एक बड़ा शेयरधारक है?

हमे ‘वन टाटा’ को टाटा सन्स, टाटा ट्रस्ट्स आदि के प्रिज़्म से नहीं देखना चाहिए। बल्कि हमें इसे सम्पूर्ण टाटा समूह के संदर्भ में देखना चाहिए। टाटा ट्रस्ट्स, सामाजिक विकास में जिस मात्रा का काम करता है, वह अतुलनीय है। प्रत्येक टाटा कंपनी भी इस सिद्धांत का पालन करती है और हमारे समुदायों पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। लेकिन भिन्न-भिन्न टाटा कंपनियां समान प्रकार का काम कर रही हैं; कई बार हम सामूहिक रूप से नहीं देखते हैं। यदि हम देखें - और मेरे कहने का यह अर्थ नहीं है कि हमें प्रत्येक सामाजिक थ्थान पहल को एकल रूप में देखने का दृष्टिकोण रखना होगा - और थोड़ा सा नियोजन करें तो हमारे प्रयासों का प्रभाव कहीं अधिक हो सकता है और वे अधिक व्यापक कैनवास पेश कर सकते हैं।

लेकिन ‘वन टाटा’ अंतिम आउटपुट के मामले में सबकुछ निर्धारित करना नहीं है। यह केवल तब है जब हम सहयोग की शुरुआत करते हैं तो हम संभावनाओं के बारे में जानकार हो सकते हैं। सहयोग एक यात्रा है। आप किसी ऐसे विशिष्ट लक्ष्य के साथ इस यात्रा को शुरु नहीं कर सकते हैं जिसे किसी विशिष्ट तारीख को पूरा होना है। सहयोग एक सन्स्कृति है और इसे पनपाना है और बनाना है।

हमारे पास एक सन्स्कृति है जिस पर हमें गर्व है। हमारे पास बहुत सारी विशेषताएं हैं जो विशिष्ट हैं और पिछले 150 सालों से हमारे डीएनए का हिस्सा हैं। हमें इन मूल्यों को पुनःप्रबलित करना चाहिए और उनको सहयोग, उत्तरदायित्व, प्रदर्शन और चपलता से पूरित करना चाहिए।

हमें अपनी सन्स्कृति को ऐसे अतिरिक्त गुणों से समृद्ध करने के लिए खुला रहना चाहिए जो हम सभी को लाभ दे सकें। और आज हमारे पास मार्ग को सहज करने के लिए उच्च प्रभाव वाले डिजिटल प्रौद्योगिकी टूल्स और हाथ हैं। हमारी नींव बहुत मजबूत है और भविष्य में होने वाले बदलावों के लिए इसे लचीला बनाने के लिए हम इसे अधिक मजबूत कर सकते हैं।

क्या आप टाटा ट्रस्ट्स के साथ काम करने पर विस्तार करना चाहेंगे?

टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहयोग समूह की सामाजिक प्रतिबद्धताओं का हिस्सा होगा। यह मात्रा ट्रस्ट के प्रोजेक्ट्स या ट्रस्ट में योगदान के बारे में नहीं है, बल्कि यह उनकी सन्स्थागत क्षमताओं और ज्ञान का लाभ लेने के बारे में है। हमारे सामाजिक उत्थान प्रयासों को ट्रस्ट्स के इकोसिस्टम का निर्माण का हिस्सा होना चाहिए। एक बार जब आप संलिप्तता की शुरुआत करते हैं तो आप हमारे सामने खुलने वाली नई संभावनाओं को देख सकते हैं।

आपने हाल ही में टाटा समूह के विशिष्ट क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत के बारे में बोला था। इनमें से किसे सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है और कौन सी सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण हैं।

प्रत्येक क्षेत्र समान रूप से जरूरी हैं। चपलता, उच्च प्रदर्शन, सन्स्कृति, प्रतिभा, ग्राहक फोकस — यह तब जब आप इनमें से प्रत्येक को लागू करते हैं तो आप देखते हैं कि कहां पर हमें सुधार की जरूरत है। प्रतिभा पर, सवाल है: हम सर्वश्रेष्ठ लोगों को आकर्षित करते हैं और उनको पनपने के अवसर देते हैं? प्रतिभा मात्र लोगों को काम पर रखना नहीं है; यह नेतृत्व कौशल का पोषण और निर्माण करना है।

हमें सभी दिशाओं में बढ़ना है। जाहिर है, हमें उपयुक्त कार्यक्रमों और सही प्रौद्योगिकीय टूल्स की जरूरत है। लेकिन फिर भी, यह आसान नहीं है। डिजिटल होने के लिए, उदाहरण के लिए, हम बुनियादी ढ़ांचे को बना सकते हैं लेकिन डिजिटल दुनिया में रूपांतरकारी छलांग लगाना अधिकांशतः हमारी कंपनियों और कर्मचारियों पर निर्भर करता है। इसके लिए प्रत्येक कंपनी के शीर्ष स्तरों पर प्रतिबद्धता की जरूरत है। यह रातों रात, यह कहने से नहीं हो सकता है कि हमे डिजिटल हो जाएंगे और काम पर पांच लोगों को लगा दिया।

ग्राहक केन्द्रीयता भी कंपार्टमेंटलाइज़ नहीं की जा सकती है। हम कह सकते हैं कि किसी टाटा कंपनी में 10 लोग ग्राहक फोकस पर ध्यान दे सकते हैं। ग्राहक-केन्द्रीय सन्स्कृति का अर्थ है यह है कि कंपनी के प्रत्येक व्यक्ति, चीफ एक्जीक्यूटिव से लेकर फ्रंट डेस्क से लेकर बैक ऑफिस के सभी स्तरों के स्टाफ को यह पता होना चाहिए कि किसी ग्राहक पर उसका वास्तविक प्रभाव क्या होता है। मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि टाटा के पास ग्राहक केन्द्रीय फोकस नहीं है, लेकिन हमें इसमें सतत होने की जरूरत है। इसे हमारे सन्स्कृति में शामिल होना चाहिए।

चुनौतियां समीकरण में नहीं आती हैं। कोई और उनमें से सभी को संभाला जा सकता है, अगर हमारा आउटलुक सही हो। हालांकि, हमें इस बारे में ईमानदार होना होगा कि हम कहां पर उत्कृष्ट हैं और कहां पर नहीं।

समूह के रूप में आपके अनुसार हम कहां पर कमजोर हैं?

प्रत्येक टाटा कंपनी भिन्न है और उनमें से प्रत्येक इसकी ताकतों और कमजोरियों के बारे में जानकार रही है। हमें इन अंतरों को कम करने पर काम करना है और यह एक सतत प्रक्रिया है। जिस पल आप यह दावा करते हैं, “मैने हासिल कर लिया”, आप हार जाते हैं। जैसा कि मैने पहले कहा कि हमें समूह में अधिक समानता लानी है।

एक बार जब हमारे डीएनए में ‘वन टाटा’ का सिद्धांत शामिल हो जाता है, तो यह एक ऐसा टूल होगा जो हर तरह से हमारी प्रगति में सहायक होगा। यह उत्तरदायित्व की सन्स्कृति है। हम पहले ही एक बेहतरीन सन्स्कृति हैं, वह जो न्यायोचित, पारदर्शी और नैतिक है। हमें चपलता, सहयोग और उच्च प्रदर्शन जैसे गुणों को हासिल करने की जरूरत है। इनके विकास में समय लगता है।

प्रौद्योगिकी और डिजिटलाइजेशन को गहनता से जानने वाले व्यक्ति के रूप में, टाटा जैसे किसी समूह के लिए वह इष्टतम तरीका क्या है जो डिजिटल क्रांति क अधिकांश लाभ ले सके।

डिजिटाइजेशन एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर हमें बहुत कुछ हासिल करना है। यह मात्र एक प्रोजेक्ट नहीं है; यह सोचने का एक नया तरीका है। दुनिया तेजी से बदल रही है; प्रत्येक भौतिक पहलू का अब एक डिजिटल ओवरले है। टाटा कंपनियों को उनकी डिजिटल यात्रा के बारे में सोचना है। उनको समझना है कि उनके लिए इसके क्या मायने हैं, उनको इसे अपनाने और इसके लिए अनुकूलित होने के लिए खुले रहना है, और अपने बिजनेस मॉडल में जरूरी बदलाव करना है। हम निश्च्त रूप से अपनी कंपनियों के साथ इंगेज करेंगे और उनको जरूरी टूल्स देंगे जिससे कि वे इस यात्रा की शुरुआत कर सकें।

आपने फोर्ब्स मैगजीन के साथ अपने साक्षात्कार में कहा था कि टाटा बिजनेस पोर्टफोलियो में “निश्चय” ही पर्निंग होगी। क्या आप इस थोड़ा स्पष्ट करेंगे?

किसी बिजनेस समूह में आप सतत रूप से ऐसे निर्णय लेते रहते हैं जो वित्तीय सेंस रखते हैं। मैने स्पष्ट रूप प्रतिफल और पूंजी आवंटन पर जोर दिया है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है के हम उन व्यवसायों से बाहर हो जाएंगे जो हमारे लक्ष्यों को पूरा नहीं करेंगे। हमने हमेशा प्रत्येक टाटा बिजनेस की संभावना को हासिल करने का कठोर प्रयास किया है। हालांकि, ऐसे समय होते हैं जब कठोर निर्णय जरूरी हो जाते हैं।

हमें अपने हर एक व्यवसाय में उच्चतम स्तर का प्रदर्शन करना होगा। यदि हम प्रतिस्पर्धी से कम प्रदर्शन करेंगे, जबकि बाजार या उद्योग में संभावनाएं होंगी तो हमें निश्चय ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बस ये कह देना काफी नहीं होगा कि ये साल पिछवे साल से बेहतर था। उद्योग के प्रोफाइल, मौजूदा अवसरों और संभावनाओं पर विचार करना, और उस संभावना को मैच करने वाला प्रदर्शन करना जरूरी होगा। टाटा समूह को उस प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड के लिए जाना, जाना चाहिए जिसे हमने नैतिक अभ्यासों के माध्यम से खड़ा किया है।

रतन टाटा ने कहा था कि टाटा इंटरप्राइस को उनके उद्योग में नंबर 1 या 2 होना चाहिए, या फिर उस बिजनेस में उनके होने का कोई औचित्य नहीं है। क्या आप भी इसी बात को मानते हैं?

श्री टाटा का अर्थ यह था कि प्रत्येक कंपनी को शीर्ष प्रदर्शन करने वाला बनना होगा और मैं इस विचार से पूरी तरह से सहमत हूँ। उच्च प्रदर्शन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। हालांकि, हमें यह समझना चाहिए कि स्टील कंपनी एक आईटी कंपनी से भिन्न होती है जो कि एक वित्तीय कंपनी से भी अलग होती है।

हमारे पास अनेक लाभ हैं, जिसमें एक विशिष्ट ब्रांड शामिल है। जब हम एक बिजनेस शुरु करना चाहते हैं तो हमारे पास तेजी से बढ़ने के लिए टेलविंड भी होती है। फिर क्यों हमें अपने वर्ग में सर्वश्रेष्ठ का लक्ष्य नहीं करना चाहिए? यह हमारे, हमारे हितधारकों और टाटा ब्रांड के प्रति कर्ज है।

मुझे लगता है कि हर वो व्यक्ति जो एक व्यवसाय चला रहा है, जानता है कि उच्च प्रदर्शन क्या है। मेरे लिए, बिजनेस आकांशा से शुरु होता है, जिसके बाद रणनीति, प्रतिभा, कौशल और शेष चीजें आती हैं। यदि हम आकांक्षा नहीं रखेंगे तो हम उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच सकेंगे जहां हम जाना चाहते हैं।

क्या समूह के पुनःसंरेखण में वित्तीय प्रदर्शन और लाभ कमाने की क्षमता, वृद्धि से अधिक महत्वपूर्ण हो रही है?

यह कुछ यह पूछने जैसा है कि फिच होना तेज दोड़ने से अधिक महत्वपूर्ण है। ये दोनो चीजें साथ जाती हैं। प्रगति पर हमें अपने वर्ग में सवर्श्रेष्ठ रहना है और लाभ पर भी; ये दोनो ही महत्वपूर्ण हैं। किसी भी संदर्भ में यह सही संतुलन हासिल करना है। कोई भी व्यवसाय केवल वृद्धि या केवल लाभ पर जीवित नहीं रह सकता है।

भारत का स्थानीय बाजार एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर अब टाटा कंपनियां अधिक ध्यान देंगी। यहां पर अपेक्षित लाभ क्या हैं?

भारत में हमारे व्यवसायों में से अनेक के लिए बेहतरीन अवसर उपलब्ध हैं। उनको इस अवसर को निवेश करने और भारत की प्रगति गाथा में योगदान देने में उपयोग करना चाहिए। मैं देश की आर्थिक संभावनाओं को लेकर काफी सकारात्मक हूँ।

मेरा विश्वास है कि भारत के अलावा कोई भी दूसरा बाजार अगले 10-20 सालों में इतनी तेजी से नहीं बढ़ने वाला है। हमारे जनसांख्यिकीय प्रोफाइल को देखते हुए, हमारे पास एक ऐसी उपभोक्ता जनसंख्या होगी जिसके पास उच्च व्यय शक्ति होगी। यह विशाल बाजार है, टाउन का सबसे बड़ा गेम। ऐसा कहते हुए, हमारे व्यवसायों को उनकी वैयक्तिक स्थानीय संभावनाओं को समझना होगा क्योंकि उन सबी के पास समान वृद्धि अवसर नहीं भी हो सकते हैं। हर एक को अपनी रणनीति बनानी होगी और इसे कंपनी विशिष्ट होना होगा।

टाटा समूह की लगातार आलोचना होती रहीत है कि यह बहुत फैला हुआ है और परिणामतः अपनी संभावनाओं का पूरी तरह से लाभ नहीं ले पाता है। आपकी क्या राय है?

इसमें कुछ सच्चाई जरूर है। टाटा समूह में हमारे पास बहुत सारी कंपनियां हैं और समेकन का एक स्तर जरूरी है। हमारी उद्यमिता भावना की ख्याति को हानि पहुंचाए बिना, हमारा लक्ष्य समेकन के इष्टतम स्तर को हासिल करने का होना चाहिए। हमने सारे विवरणों पर विस्तार से काम नहीं किया है। इस पर हमारे अपने विचार हैं और हम उन पर सावधानी के साथ विचार करेंगे।

टाटा समूह में शीर्ष स्तरों पर अनेक नियुक्तियां की गयी हैं। इनको आप समूह के लिए किस तरह से लाभकारी देखते हैं?

हमें अपने विजन को निष्पादित करने के लिए कुछ बुनियादी इन-हाउस क्षमताओं की जरूरत है। टाटा सन्स के प्रभावी रूप से हमारी ऑपरेटिंग कंपनियों के साथ काम करने के लिए और उनको जरूरी सहायता देने के लिएम हमें बहुत सारे कौशलों की जरूरत हैं। अवसरों की पहचान करने और सही पूंजी आवंटन व निवेश निर्णयों को करने में हमारी कंपनियों को सक्षम करने के लिए, हमें अपनी रणनीतिक सलाह तथा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमताएं मजबूत करने की जरूरत है।

टाटा रणनीतिक प्रबंधन समूह के भीतर हमें ऐसी बुनियादी क्षमताओं को बनाने की जरूरत है जिससे कि हम समूह के एकजुट पार्टनर बन सकें। इसका मतलब यह नहीं है कि हम जरूरत पड़ने पर बाहरी एजेंसियों के पास नहीं जाएंगे, लेकिन बुनियादी क्षमताओं का विकास करना भी बहुत जरूरी है।

चुनिंदा व्यवसायों में हम अपनी लीडरशिप क्षमताओं को बेहतर कर रहे हैं। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस [टीसीए], बड़ी तीन कंपनियों के अलावा, हम वित्तीय सेवाओं, बुनियादी ढ़ांचे, उपभेक्ता व्यवसाय, और यात्रा व आतिथ्य में भी बेहतर भूमिका चाहते हैं।

यदि आपको टाटा कर्मचारियों को तीन-बिंदु का संदेश देना हो तो, वह क्या होगा?

वन टाटा, वन टाटा, वन टाटा। मैं दोहराना चाहता हूं:‘आइये सहयोग करें और आकांक्षाएं रखें’। इनको बिजनेस स्तर पर होने की जरूरत नहीं है; ये वैयक्तिक स्तर पर हो सकता है। मैं कहता रहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता का जिताना एहसास होता है उसके पास उससे अधिक क्षमता होती है। हमें अपने लोगों को आंकांक्षी बनाना है; एक बार जब ऐसा होगा तो हर चीज अपने आप हो जाएगी।

आने वाले पांच बरसों में समूह से आपकी क्या अपेक्षा है?

हमारा फोकस भविष्य पर होना चाहिए। हमें चुस्त होने की जरूरत है, बदलावों के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता के निर्माण की जरूरत है, और डिजिटल दुनिया के तेजी से विकसित के साथ अनुकूलन की जरूरत है। हमें डिजिटल दुनिया और बदलती उपभोक्ता अपेक्षाओं के लिए अनुकूलित होकर मौजूदा व्यवसायों को रूपांतरित करने की जरूरत है।

जाहिर तथ्यों के अलावा, टाटा समूह के चेयरमैन और टीसीएस के मुखिया के बीच क्या अंतर है?

टीसीएस, वास्तव में एक ग्लोबल कंपनी है। टीसीएस की ऐसे वैश्विक क्लाइंटों के साथ काम करने की यात्रा का हिस्सा होने का मुझे सौभाग्य हासिल है जो अपने व्यवसाय को नई प्रौद्योगिकियों और बदलती बाजार डायनामिक्स के लिए अनुकूलित करने पर फोकस थे। इसने मुझे, व्यवसाय रूपांतरण और बिजनेस मॉडलों पर प्रौद्योगिकीय प्रभाव के बारे में बहुमूल्य अंतःदृष्टि दी।

टीसीएस में मेरे कार्यकाल में मैने बिजनेस को बनाने और तेजी से बढ़ाने के बारे में सीखा। मैने वैश्विक संबंध विकसित किए और पूरी दुनिया की सन्स्कृतियों के लिए गहरी सराहना विकसित की। मैने अपने सोचने के तरीके को कई तरह से खोला।

समूह के स्तर पर, काम की प्रकृति भिन्न है। विविधतापूर्ण व्यवसाय समूहों का यह संभवतः सबसे बड़ा प्लेटफार्म है। हमारे पास विशाल और प्रतिभाशाली कर्मचारी आधार और एक जबरदस्त सन्स्कृति है लेकिन निश्चय ही चुनौतियां भी हैं।

पहले की तुलना में शब्द ‘प्रयोजन’ को लेकर मैं अधिक सचेत हो गया हूँ। मुझे एहसास है कि मेरे ऊपर ‘प्रयोजनशील व्यवसाय’ के विकास का विशाल उत्तरदायित्व है। मैने इस बारे में व्यापक दृष्टिकोण रखा है कि समूह, उद्योग और देश के लिए क्या अच्छा है। इसके अलावा, निर्णय लेने की प्रक्रिया भिन्न है। मैं इसके हर पल का आनंद ले रहा हूँ।